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One Nation One Election: कल पेश नहीं किया जाएगा ‘वन नेशन, वन इलेक्शन’ का बिल, जानें वजह

One Nation One Election: नमस्कार दोस्तों! केंद्र सरकार ने ‘One Nation One Election’ विधेयक पर अपनी योजना में बड़ा बदलाव किया है। पहले इसे 16 दिसंबर 2024 को लोकसभा में पेश किया जाना था, लेकिन संशोधित कार्य सूची में यह शामिल नहीं है। यह अचानक किए गए बदलाव को दर्शाता है। पहले विधेयक बिजनेस लिस्ट में था, लेकिन अब इसे हटा दिया गया है। जानने के लिए लेख अंत तक अवश्य पढ़ें!

One Nation One Election

One Nation One Election

केंद्र सरकार ने ‘One Nation One Election’ को लेकर अपनी रणनीति में बड़ा बदलाव किया है। पहले उम्मीद की जा रही थी कि 16 दिसंबर 2024 को लोकसभा में संविधान संशोधन विधेयक (100 और 29) और यूनियन टेरेटरीज संशोधन विधेयक 2024 पेश किए जाएंगे। हालांकि, अब संशोधित कार्य सूची में ‘वन नेशन, वन इलेक्शन’ विधेयक शामिल नहीं है।

यह बदलाव सरकार की योजना में अचानक किए गए परिवर्तन को दर्शाता है। इससे पहले यह विधेयक बिजनेस लिस्ट का हिस्सा था, लेकिन अब इसे सूची से हटा दिया गया है।सरकार का यह फैसला विपक्ष और जनता के बीच चर्चा का विषय बन गया है। संशोधित कार्य सूची में इस बदलाव की स्पष्ट वजह नहीं बताई गई है, लेकिन यह निश्चित है कि इससे सरकार के इस महत्त्वपूर्ण प्रस्ताव पर बहस और आलोचना बढ़ेगी।

विपक्ष का विरोध और सवाल

One Nation One Election‘ विधेयक को लेकर विपक्षी दलों ने सरकार पर निशाना साधा है। समाजवादी पार्टी के अध्यक्ष अखिलेश यादव ने इसे लेकर तंज कसते हुए कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के पास सरकारों को भंग कर फिर से चुनाव कराने का यह एक अच्छा मौका है। उन्होंने इसे जुमलों पर आधारित योजना बताते हुए इसकी मंशा पर सवाल उठाए।कांग्रेस सांसद सुखदेव भगत ने इसे देश के संघीय ढांचे पर हमला बताया। विपक्ष का मानना है कि यह प्रस्ताव न केवल राजनीतिक स्वतंत्रता को बाधित करेगा, बल्कि केंद्र और राज्यों के अधिकारों में असंतुलन भी पैदा करेगा। यह विरोध सरकार के इस निर्णय को और अधिक चुनौतीपूर्ण बना सकता है।

One Nation One Election‘ के फायदे

One Nation One Election

सरकार की ओर से ‘One Nation One Election‘ के कई फायदे गिनाए गए हैं। केंद्रीय कपड़ा मंत्री गिरिराज सिंह ने कहा कि यह देश हित में है। इससे चुनावी खर्चों में कटौती होगी और पैसे की बचत होगी। उनका तर्क है कि यह प्रक्रिया विकास को बाधित नहीं करती बल्कि गति देती है।उन्होंने 1967 तक की स्थिति का हवाला देते हुए कहा कि उस समय भी ‘एक देश, एक चुनाव’ का पालन किया जाता था और संघीय ढांचे पर कोई असर नहीं पड़ा था। उन्होंने इसे देश को मजबूत और विकास को बढ़ावा देने वाला कदम बताया।

संघीय ढांचे पर प्रभाव की आशंका

विपक्ष का कहना है कि ‘One Nation One Election देश के संघीय ढांचे पर नकारात्मक प्रभाव डाल सकता है। समाजवादी पार्टी और कांग्रेस के नेताओं ने इसे लोकतांत्रिक स्वतंत्रता और राज्यों की स्वायत्तता के खिलाफ बताया।वहीं, सरकार का कहना है कि यह देश के लिए आवश्यक है और यदि कोई बदलाव होगा, तो वह कानून के दायरे में रहकर किया जाएगा। जनता से विचार-विमर्श भी किया जाएगा।

सरकार का यूटर्न और इसके निहितार्थ

One Nation One Election

केंद्र सरकार द्वारा इस विधेयक को फिलहाल टालने का निर्णय कई सवाल खड़े करता है। यह स्पष्ट नहीं है कि इसे संशोधित रूप में फिर से पेश किया जाएगा या नहीं। संशोधित कार्य सूची में इसे शामिल न करने का निर्णय विपक्ष के दबाव या अन्य राजनीतिक रणनीति का हिस्सा हो सकता है।हालांकि, ‘One Nation One Election‘ का मुद्दा भविष्य में भी चर्चा का केंद्र रहेगा। सरकार को इस विधेयक को लेकर सभी हितधारकों के साथ व्यापक बातचीत करनी होगी।

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