Mahakumbh Stampede Update: नमस्कार दोस्तों, प्रयागराज महाकुंभ 2025 के मौनी अमावस्या स्नान के दौरान मची भगदड़ ने सभी को झकझोर कर रख दिया। इस हादसे में 30 श्रद्धालुओं की मौत और 90 से अधिक घायल हो गए। प्रशासनिक लापरवाही पर सवाल उठ रहे हैं—क्या सुरक्षा व्यवस्था नाकाफी थी? भीड़ नियंत्रण में चूक कैसे हुई? इन सभी सवालों के जवाब जानने के लिए अवश्य पढ़ें!
Mahakumbh Stampede Update
प्रयागराज महाकुंभ 2025 के दूसरे और सबसे बड़े पर्व मौनी अमावस्या पर संगम पर आस्था का सैलाब उमड़ा, लेकिन इसी दौरान एक भयानक हादसा हो गया। मंगलवार देर रात लगभग 1:30 बजे संगम पर अचानक भगदड़ मच गई, जिसमें 90 से अधिक श्रद्धालु घायल हो गए और 30 श्रद्धालुओं की दर्दनाक मौत हो गई। मृतकों में से 25 की पहचान हो चुकी है, जबकि पांच की अब भी शिनाख्त नहीं हो पाई है। प्रशासन ने इस घटना की पुष्टि बुधवार देर शाम प्रेस कॉन्फ्रेंस में की।
यह हादसा कई सवाल खड़े करता है। प्रशासन ने पहले से ही आठ से दस करोड़ श्रद्धालुओं के आगमन का अनुमान लगाया था, लेकिन इतने बड़े आयोजन के लिए पर्याप्त इंतजाम क्यों नहीं किए गए? पुलिस और प्रशासनिक अधिकारी दावा कर रहे थे कि व्यवस्थाएं पूरी तरह चाक-चौबंद हैं, लेकिन छोटी-सी चूक ने कई निर्दोष जिंदगियां छीन लीं। आइए, जानते हैं कि आखिर यह हादसा किन कारणों से हुआ।
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भगदड़ के पांच प्रमुख कारण
होल्डिंग एरिया का सही इस्तेमाल न होना
संगम क्षेत्र में श्रद्धालुओं की भीड़ को नियंत्रित करने के लिए 84 होल्डिंग एरिया बनाए गए थे। लेकिन जब मंगलवार रात लाखों श्रद्धालु संगम पहुंचने लगे, तो इनका सही ढंग से इस्तेमाल नहीं किया गया। रात 8 बजे से श्रद्धालुओं को संगम की ओर भेजने की प्रक्रिया शुरू हुई, जिसके कारण रात 9 बजे से संगम पर भारी भीड़ उमड़ पड़ी। अमृत स्नान की प्रतीक्षा कर रहे श्रद्धालु एक ही स्थान पर इकट्ठा हो गए, जिससे भगदड़ की स्थिति बनी।
वन वे प्लान पूरी तरह फेल
प्रशासन ने स्नान के लिए एक ‘वन वे प्लान’ बनाया था, जिसके अनुसार श्रद्धालु काली सड़क से त्रिवेणी बांध पार कर संगम पहुंचेंगे और अक्षयवट मार्ग से बाहर निकलेंगे। लेकिन यह योजना पूरी तरह फेल हो गई। अक्षयवट मार्ग पर बहुत कम श्रद्धालु गए, जबकि संगम अपर मार्ग पर आवागमन बना रहा। इस असंतुलन के कारण संगम क्षेत्र में भारी भीड़ जमा हो गई और भगदड़ जैसी स्थिति उत्पन्न हो गई।
पांटून पुलों का बंद रहना
सुव्यवस्थित आवागमन के लिए मेले में 30 पांटून पुल बनाए गए थे, लेकिन प्रशासन ने इनमें से 12 से 13 पुलों को बंद कर रखा था। इससे श्रद्धालुओं को कई किलोमीटर पैदल चलना पड़ा, जिससे वे थककर संगम के किनारे बैठ गए। इससे वहां भीड़ लगातार बढ़ती गई और भगदड़ का रूप ले लिया।
प्रमुख मार्गों पर बैरिकेडिंग और सड़कों को बंद रखना
प्रशासन ने महाकुंभ के लिए सड़कों को चौड़ा किया था, लेकिन प्रमुख मार्गों पर बैरिकेडिंग कर दी गई। इससे श्रद्धालुओं को लगातार चलते रहना पड़ा, जिससे वे थककर संगम के किनारे बैठने लगे। इससे संगम क्षेत्र में भीड़ और बढ़ गई और हालात बिगड़ते चले गए।
राहत और बचाव कार्य में देरी
आपात स्थिति से निपटने के लिए सीआईएसएफ और अन्य सुरक्षा बलों को मेले में तैनात किया गया था, लेकिन इनकी तैनाती अलग-अलग सेक्टरों में नहीं की गई। सीआईएसएफ की एक कंपनी को सेक्टर नंबर 10 में ठहराया गया था, जबकि हादसा सेक्टर 3 में हुआ। जब इन सुरक्षाबलों को बुलाया गया, तो उन्हें घटनास्थल तक पहुंचने में काफी समय लग गया, जिससे हालात और बिगड़ गए।
प्रशासनिक लापरवाही और भविष्य की सुरक्षा उपाय
इस हादसे ने प्रशासन की तैयारियों पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। अगर होल्डिंग एरिया को सही ढंग से संचालित किया जाता, पांटून पुलों को खोला जाता और राहत बलों की तैनाती सही ढंग से होती, तो शायद यह त्रासदी रोकी जा सकती थी।
भविष्य में ऐसे हादसों से बचने के लिए प्रशासन को निम्नलिखित कदम उठाने चाहिए:
- होल्डिंग एरिया का उचित प्रबंधन – श्रद्धालुओं को चरणबद्ध तरीके से संगम की ओर भेजा जाए।
- वन वे प्लान की सख्ती से निगरानी – हर मार्ग पर प्रशासनिक अधिकारियों की तैनाती सुनिश्चित की जाए।
- सभी पांटून पुलों को चालू रखा जाए – इससे श्रद्धालुओं का दबाव अलग-अलग दिशाओं में बंट सकेगा।
- बेहतर मार्ग प्रबंधन – बैरिकेडिंग करने से पहले आपातकालीन निकासी के लिए पर्याप्त विकल्प उपलब्ध कराए जाएं।
- राहत और बचाव टीम की तैनाती बेहतर ढंग से की जाए – ताकि किसी भी आपात स्थिति में तुरंत कार्रवाई की जा सके।
निष्कर्ष
प्रयागराज महाकुंभ में हुई इस दर्दनाक घटना ने आस्था और व्यवस्था के बीच तालमेल की कमी को उजागर कर दिया है। प्रशासन की छोटी-सी लापरवाही ने 30 निर्दोष श्रद्धालुओं की जान ले ली। ऐसे आयोजनों में सुरक्षा और भीड़ प्रबंधन की पुख्ता व्यवस्था होनी चाहिए, ताकि भविष्य में इस तरह की घटनाओं से बचा जा सके। प्रशासन को अब और सतर्क रहकर अगले पर्वों के लिए बेहतर योजना बनानी चाहिए ताकि श्रद्धालु सुरक्षित स्नान कर सकें और महाकुंभ की गरिमा बनी रहे।
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